पहलगाम हमला: कौन है इसका मास्टरमाइंड? जानिए टीआरएफ की खूनी साजिश के 5 बड़े खुलासे
हमला जिसने कश्मीर की शांति को तोड़ दिया
पहलगाम आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की दर्दनाक मौत ने देश को झकझोर दिया। जानिए इस हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी, टीआरएफ और पाकिस्तान की भूमिका के बारे में 5 अहम बिंदुओं में विस्तार से।
22 अप्रैल 2025—ये दिन कश्मीर के इतिहास में एक और काले दिन की तरह दर्ज हो गया।
पहलगाम की खूबसूरत बैसरन घाटी में सैर पर निकले मासूम पर्यटकों पर गोलियां बरसा दी गईं। इस हमले में 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
इस दर्दनाक मंजर ने पूरे भारत को झकझोर दिया। लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि इस हमले की जिम्मेदारी एक नए लेकिन बेहद खतरनाक आतंकी संगठन—द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF)—ने ली।
1. सैफुल्लाह कसूरी: खूनी खेल का मास्टरमाइंड

जिन हाथों ने इस बर्बर साजिश की स्क्रिप्ट लिखी, उसका नाम है—सैफुल्लाह कसूरी। इसे लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर कमांडर और हाफिज़ सईद का करीबी माना जाता है। कसूरी का कोडनेम ‘खालिद’ है और वह पेशावर स्थित लश्कर मुख्यालय से हमलों को अंजाम देता है।
सूत्रों के मुताबिक, हमले का टाइमिंग जानबूझकर उस वक्त चुना गया, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब में थे और अमेरिकी उपराष्ट्रपति भारत दौरे पर। यह सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक संदेश था।
❝ कसूरी ने घाटी में छिपे आतंकियों के लिए सटीक मौका तलाशा और जब दुनिया की नजरें कहीं और थीं, तब उसने हमला करवाया। ❞
2. कसूरी का पाकिस्तान कनेक्शन: पेशावर से कश्मीर तक
सैफुल्लाह कसूरी सिर्फ एक आतंकी नहीं, बल्कि पाकिस्तान के आतंकी तंत्र का एक अहम मोहरा है। साल 2017 में उसने जमात-उद-दावा की राजनीतिक शाखा मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) के अध्यक्ष के रूप में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
ये वही संगठन है जिसे अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही लश्कर-ए-तैयबा की ब्रांच मानकर प्रतिबंधित कर दिया था। कसूरी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की कोऑर्डिनेशन कमेटी में भी रह चुका है।
❝ इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तान का आतंकी नेटवर्क इस हमले की पूरी पटकथा के पीछे था। ❞

3. टीआरएफ: आतंक का नया नाम
द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) की स्थापना 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद हुई। इसका मकसद था—कश्मीर के आतंकी संघर्ष को धार्मिक रूप न देकर “स्थानीय प्रतिरोध” दिखाना।
टीआरएफ ऑनलाइन माध्यमों से कश्मीरी युवाओं की ब्रेनवॉशिंग करता है, उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल करता है और पाकिस्तान से हथियार व ड्रग्स की तस्करी करता है। गृह मंत्रालय ने इसे यूएपीए के तहत आतंकी संगठन घोषित किया है।
टीआरएफ ने सिर्फ हथियार नहीं, सोशल मीडिया को भी आतंक फैलाने का ज़रिया बना दिया है।

4. आसिफ फौजी: ग्राउंड पर कहर ढाने वाला कमांडर
हमले के दिन जो आतंकी गोलियां बरसा रहे थे, उनमें से एक नाम सबसे ज़्यादा उभरा—आसिफ फौजी। कहा जा रहा है कि यह वही व्यक्ति था जिसने हमले की लीड ली। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, वो कभी पाकिस्तानी सेना से जुड़ा था, इसीलिए ‘फौजी’ कहा जाता है।
चश्मदीदों ने बताया कि कुछ आतंकी पश्तो में बात कर रहे थे, जिससे उनके पाकिस्तानी मूल की पुष्टि होती है। वहीं दो स्थानीय आतंकियों की पहचान बिजबेहड़ा और त्राल से की गई है।
❝ आतंक का चेहरा भले ही लोकल लगे, पर साज़िश की जड़ें सीमा के पार गहरी हैं। ❞
5. पाकिस्तान का इशारा पहले से था साफ
हमले से पहले पाकिस्तान की धरती पर दो घटनाएं सामने आईं:
- 16 अप्रैल—पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर ने दो-राष्ट्र सिद्धांत को हवा दी और हिंदू-मुस्लिम के “गहरे अंतर” की बात की।
- 18 अप्रैल—लश्कर कमांडर अबू मूसा ने रावलकोट में कश्मीर में जिहाद की बात की और 370 का बदला लेने की धमकी दी।
इन दोनों बयानों से साफ था कि कोई बड़ा हमला आने वाला है, और भारत की खुफिया एजेंसियों ने भी इसे पकड़ा था।
भारत की आंखें नम, पर इरादा बुलंद
26 मासूम जिंदगियों का बलिदान सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक सवाल है—कब तक पाकिस्तान के इशारे पर मासूमों का खून बहाया जाएगा?
इस हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर गुस्सा उबाल पर है, और पूरा भारत एक सुर में पूछ रहा है:
“अब और कितनी जानें जाएंगी?”
निष्कर्ष: अब वक्त है जवाब का
इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आतंक का चेहरा चाहे नया हो, उसके पीछे की सोच वही पुरानी है—भारत को अस्थिर करना, शांति को तोड़ना और मासूमों का खून बहाना।
अब समय है कि भारत सिर्फ जवाब न दे, बल्कि इस आतंकी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंके
